गुरुकुल में है भारतीय ज्ञान परंपरा: मिथिलेश नंदिनीशरण
- Mar 01, 2025
- Super Admin
- मध्यप्रदेश
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा है कि हमारे धर्म, अध्यात्म, ग्रंथ और भारतीय परंपराअों में भी विज्ञान निहित है। ये परंपराएं भले लिखित न हों लेकिन वाचिक हैं। धर्म और अध्यात्म को विज्ञान से अलग नहीं कर सकते। हमारा भाव केवल मनुष्य से संवाद का नहीं बल्कि पर्यावरण के साथ संवेदना का भी है।
मेपकास्ट परिसर में दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शोधार्थी समागम-2025 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री परमार ने लोक परंपराअों में भी वैज्ञानिकता के दर्शन कराए। कार्यक्रम में अयोध्या श्रीहनुमन्निवास के पीठाधीश्वर आचार्य मिथिलेश नंदिनीशरण महाराज ने कहा है कि विज्ञान में मानवता का कल्याण भी शामिल हो। इसका अर्थ महज भौतिकी, रसायन और तकनीकी ही नहीं होता। भारतीय ज्ञान परंपरा गुरुकुल में निहित है। मनुष्य अपने अस्तित्व को ठीक करने के फेर में प्रकृति के ही विरुद्ध हो गया। उन्होंने कहा कि देश विचार नहीं, विश्वास परंपरा से चलता है। हमने धरती को कोरा कागज समझ कर जहां चाह वहां नाली, सड़क, नहर, इमारत बना दी। लेकिन, इस बात का ध्यान नहीं रखा कि धरती की अपनी संरचना है। वास्तु शास्त्र को अपना लिया लेकिन धरती की संरचना को नहीं समझ पाए। कार्यक्रम में 'चिंतक मुकुल कानिटकर ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सुनने की क्षमता सभी में समान होती है, लेकिन समझने की शक्ति रुचि और क्षमता पर निर्भर करती है। ज्ञानेंद्रियों की क्षमता के अनुरूप ही व्यक्ति ज्ञान अर्जित करता है।